Monday, 13 February 2012

A group discussion in Bidhuna (Etawah )UP.

 'क्या महिलाओ  की प्रगति अलगाव का कारण बन रही  है या अधिकार की आवाज' ?विषयक पर बिधुना ,(जिला औरैया) में भुवनेश्वर नाथ जी मिश्र के आवास पर कोलकाता से निकलने वाली  'द वेक' हिंदी मासिक पत्रिका की संपादक शकुन त्रिवेदी की तरफ से 
   एक विचार गोष्ठी  का आयोजन किया गया ,जिसमे विभिन्न क्षेत्रो से आये प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपनी भागीदारी निभाते हुए  विचार व्यक्त किये .

सुभाष चन्द्र त्रिपाठी ,
दहेज़ भी एक बहुत बड़ा कारण है तलाक का .अगर बहु दहेज़ में काफी सामान लेकर आती है तो वो परिवार वालो का सम्मान कम करती है .क्योकि बात -बात में वो अपने मायके और ससुराल के स्तर की तुलना करेगी जिसका असर पारिवारिक संबंधो पर पड़ना ही है.आजकल की महिलाये संसकारित कम स्वछंद ज्यादा हो गयी है.
अविनिश गुप्ता ,सुभाष त्रिपाठी                        
अविनीश गुप्ता ,प्रवक्ता जयहिंद 
भारत एक पुरुष प्रधान देश है ,जिसमे महिलाये हमेशा दबा कर रखी गयी है. आज  की महिलाये शिक्षित है,वे चाहती है की पुरुष उनकी  भावनाओ को  समझे और उन्हें   सम्मान दे .वे अपने साथ किये गए अन्याय का विरोध करना जानती है.तलाक के रूप में उसका कदम  अन्याय के विरुद्ध सर उठाना है.
विवेक कुमार गुप्ता ,
बहुत बार महिलाओ का शोषण उसकी ससुराल वाले करते है.जिसमे अक्सर बेटे मूक रहकर या अपने परिवार का साथ रह कर उस अत्याचार में साथ देते है.उनकी ज्यादतियों से तंग आ कर  भुत बार पत्निया तलाक की और मुख कर लेती है. कई बार ऐसा भी होता है की कोई -कोई महिला का पहले से ही किसी के साथ सम्बन्ध होता है और परिवार वाले जबरदस्ती शादी कर देते है ,तब वे ४९८ का  सहारा लेती है. और निरपराध पति को जेल भिजवा देती है. बहुत बार लड़की के मायके वाले भी जरा  सी बात को तूल  दे देते है.जो बिखराव का कारण बन जाता है.
अमर सेन मिश्र ,
जिस तरह शारीर के प्रत्येक अंग का अपने  अपने स्थान पर  महत्त्व है. उसी तरह से पति -पत्नी के रिश्ते और उनके दायित्वों की भी महत्वता है. अगर चोट पैर में लगेगी तो दर्द शरीर में होगा वैसे ही अगर वैवाहिक जीवन जिद्द और अहम् के चलते टूटेगा तो तकलीफ बच्चो को होगी. ये आज की युवा पीढ़ी भूल रही है. जिस प्रकार साईकिल का अगला पहिया जिधर मुड़ता है उधर ही पिछला पहिया मुड जाता है .अगर दोनों पहिये अलग अलग दिशा में मुडेगे तो साईकिल का गिरना निश्चित है .ऐसी ही विचारधारा और समझ दाम्पत्य जीवन में होनी चाहिए .
विजय शक्ति ,
पाश्चात्य सभ्यता का बोलबाला जबसे बढ़ा है तब से ही तलाक का प्रचलन चला है.आज के दौर में हर लड़का व् लड़की की चाहत होती है सारी भौतिक सुख सुविधाओ को भोगना इसके लिए दोनों ही काम करेंगे जब दोनों काम करंगे तो घर कौन सम्हालेगा .दोनों में से कोई झुकना ही नहीं चाहेगा तो घर  टूटेगा ही .सच ये है की स्त्री पुरुष दोनों ही अपने को ज्यादा आधुनिक दिखाने के कारण समझौते कम कर  रहे   है.लडकियों को भी मायके वाले संस्कार कम दे रहे है अहम् की परिभाषा ज्यादा सिखा रहे है.वे उन्हें ये समझाने के बजाय की घर बिखरेगा तो तकलीफ तुम्हे भी उतनी ही होगी जितनी की लड़के को .वो उसे समझौता न करने की सलाह दे रहे है.
     मनोज त्रिवेदी ,विजय शक्ति ,अमर सेन मिश्र                              
मनोज त्रिवेदी,
पूरा विश्व पुरुष प्रधान देश है . अमेरिका में आज तक महिला राष्ट्रपति नहीं बनी .भारत तो उस हिसाब से काफी  आगे है.तलाक हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है. क्योकि   पहले हिन्दुओ में भी तीन -चार शादी होती थी लेकिन सब साथ  रहा करते थे कभी कोई शिकायत नहीं होती .दूसरी बात की  हमारे  यहाँ बड़े -बुजुर्ग की जिम्मेदारी होती थी घर को बचाने की अपने बच्चो के मतभेदों को दूर करने की .लेकिन आज सभी मालिक है. कोई किसी से सलाह नहीं लेना चाहता न ही किसी की बात को सुनना . शादियाँ पहले परिवार देख कर होती थी लेकिन आज लड़की देख कर होती है. आप  कामकाजी लड़की  के साथ शादी करेंगे  और उससे   घर सम्हालने की उम्मीद करेंगे   जो की संभव नहीं है. ये भी एक कारण है अलगाव का .
रंजीत सिंह सोलंकी , लेखक ,पेंटर ,कवि 
 पाश्चात्य  सभ्यता का संस्कारो पर हावी होना ,और फिर  आँख बंद कर उनका अनुसरण करना  बिना  विचारे   की इसके नुकसान और फायदे क्या है ..दूसरा बड़ा कारण एक स्त्री का दूसरी स्त्री का दुश्मन होना सास ननद का ताने देना की बेटा अब बीबी का गुलाम बन गया है .बात -बात में उसे  नीचा दिखाना और पति का चुपचाप रहना पत्नी को पसंद नहीं आता ऐसी छोटी बाते ही तलाक को जन्म देती है.
  अनुराधा सोलंकी
एक दुसरे के विचार का न मिलना एवं शक की उत्पत्ति भी तलाक का कारण बनता है.अगर पति हर समय कामकाजी पत्नी से ही अपेक्षा करेगा की वो बाहर और घर का काम वैसे ही करे जैसे की एक गृहणी को करना चाहिए तो तलाक होना  निश्चित है.
            
                               सम्पादक शकुन त्रिवेदी  के साथ शिखा  

  
शिखा  छात्र 
पुरुष हर समय स्त्री को दोष देता है.की वो सामंजस्य नहीं बिठाना चाहती ,जबकि बहुत बार तलाक का कारण पुरुष की शारीरिक अक्षमता बनती है. पुराने समय में महिलाये छोटी -बड़ी कमी को बदनामी के भय से दबा देती थी .पति का हद से अधिक मारना भी पत्नी को तलाक लेने के लिए विवश कर देता है.  बदलते समय ने महिलाओ को अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखा दिया है.

विनीत त्रिपाठी ,
ईश्वर ने हर किसी को एक विशिष्ट योग्यता के साथ पृथ्वी पर भेजा है.उसी योग्यता को ध्यान में रखकर हम सभी को अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए .ममत्व का अद्भुत गुण नारी जाती को दिया गया है.वही बच्चे को जन्म देती है. उसका पालन पोषण भी सही तरीके से वही कर सकती है अगर पुरुष बच्चे को सम्हालेगा तो बच्चे को मानसिक शांति नहीं मिलेगी .इस लिए अगर कोई महिला ये सोचती है की बच्चे को पालने की जिम्मेदारी पति भी उतनी ही निभाए जितना की वह निभाती है तो गलत है. क्योकि पुरुष के पास वो क्षमता ही नहीं है जो नारी के पास है बच्चे को प्यार से सुलाने की .उसकी तकलीफों को समझने की .  बदलते समय के अनुरूप पत्नियों की सोच बदल रही है जो  आजकल तलाक का कारण बन रही है.
राजकुमार पण्डे ,
तलाक की घटनाये महिलाओ के विकास के कारण नहीं वरन आर्थिक स्थिति ,बच्चो की मांग ,घर की जरुरतो का पूरा न हो पाना  आदि के कारण ज्यादा हो रही है.लड़की या लड़के की माँ का बीच में आना भी तलाक का कारण बनता है.पुरुष आज भी महिलाओ का शोषण कर रहा है .शिक्षित महिलाओ ने इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी उसी का परिणाम तलाक के रूप में नजर आ रहा है.
अखिलेश त्रिपाठी ,
पहले लडकिया गुलामी में पली ,उनसे सही -  गलत जैसा भी करने को कहा गया उन्होंने वैसा ही किया लेकिन आज की लड़की शिक्षित है.,अच्छी नौकरी करती है .बढ़िया पगार पाती है. किन्तु अगर उसने पति से पानी मांग दिया तो पति का मिजाज गरम हो जायेगा.वो ये समझने की कोशिश ही नहीं करेंगा की वो भी एक इन्सान है उसे भी आराम की आवश्यकता है वो आफिस से वापस आकर खाना बना पायेगी या नही इसे पुरुष समझना नहीं चाहता जिसके कारण आये दिन दोनों में टकराव होता रहता है.जो आगे जाकर दोनों के लिए अलग -अलग मार्ग तय करता है.
भुवनेश्वर नाथ मिश्र, 
( अवकाश प्राप्त,विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, जे,ऍन. कालेज बांदा उत्तर प्रदेश )
शेक्सपियर ने अपने ड्रामा में लिखा भी है की प्रत्येक  पुरुष अपनी पत्नी का गुलाम है. इसमें कुछ भी नया नहीं है.जो कहा जाये की आजकल इस तरह की बाते हो रही है पहले भी होती थी.लेकिन बदलते वातावरण में इसको नये सन्दर्भ में देखा जा रहा है.और बहुत बार इस तरह के ताने पारिवारिक विघटन का कारण बन रहे है. जिसका मुख्य कारण अपने देशी मार्ग से हट जाना,ऋषि मुनि की दी हुयी शिक्षा व संस्कृति को भुला देना .और आधुनिकता के नाम पर अपने -अपने अहंकार को पोषित करना .पहले पुरुष के पास अहम् होता था आज शिक्षित महिलाये भी अपने पद अपनी आमदनी को प्रतिष्ठा के रूप में आंक रही है.तथा पुरुषो से अपेक्षा कर रही है की वे भी घर का उतना ही दायित्व सम्हाले जितना की पत्नी सम्हालती है.यही से टकराव आरम्भ हो जाता है .क्योकि पुरुष कमाऊ पत्नी तो चाहता है. लेकिन घर पर सहयोग करने में उसे अपमान महसूस होता है .वो बाहर से आयेगा तो यही उम्मीद करेगा की पत्नी उसे चाय बना कर दे.सामंजस्य व् समझौते की भावना ख़त्म हो रही है अहम् बढ़ रहा है जो अलगाव की मुख्य वजह बन रहा है.



Thursday, 1 December 2011

बच्चो के भविष्य को रौंदता

बच्चो के भविष्य को रौंदता 
बाजारवाद या हम 
 बाजारवाद से प्रभावित नन्ही उम्र 
इस विषय पर एक सामूहिक परिचर्चा का आयोजन  BD Memorial international  School में किया गया .
इस परिचर्चा में स्कूल अध्यापिकाओ के साथ -साथ बच्चो ने जोर शोर से भाग लिया .
SCHOOL CHILDREN
DURING AN  INTERACTION SESSION.

IN A CHEERFUL MOOD !
FOUNDER PRINCIPAL MRS. USHA MEHTA
ALONG WITH  EDITOR & NEWS EDITOR  'THE WAKE'

MR. T.P. TEWARI  ASTROLOGER 'THE WAKE' 
CHILDREN WITH THEIR PROBLEMS , 











B.D. MEMORIAL INTERNATIONAL SCHOOL 
TEACHERS ,MRS. GHATE, SIMA SINGH ,TANUSHRI ETC.



Wednesday, 30 November 2011

Football Match at Ranaghat.

Friendship Football Match ( Sampriti Cup 2011) organised by Kolkata Earth Life  & Ranaghat Agrani club
मैच आरंभ होने के पहले  झंडा फहराते रानाघाट के एम एल ऐ.

 GROUP PHOTO during Flag hoisting .
बंगलादेशी खिलाडियों से हाथ मिलाते
 कोलकाता अर्थ लाइफ के अध्यक्ष मनोज त्रिवेदी 
कृष्णानगर के खिलाडियों से हाथ मिलाते मनोज त्रिवेदी 
बंगलादेशी टीम 
 कृष्णानगर टीम 'पश्चिम बंगाल '
लिम्का बुक में नाम दर्ज करवाने वाला
फुटबाल मास्टर मीर कमालुद्दीन 
पीछे की कुर्सियों पर बैठे 'डी वेक' टीम के सदस्य.
रनर कप देते  हुए कोलकाता अर्थ लाइफ
के अध्यक्ष मनोज त्रिवेदी 



Winnig Cup  given to Bangladeshi team (defeated Krishnanagar team by 2-0.)
 by  Minister Ujjawal Bisvas (youth service)
&
Social activist Ganesh Dhanania 
सम्पृति कप २०११ का  प्रतीक चिह्न देते हुए
 शकुन त्रिवेदी (संपादक 'डी वेक")
  साक्षात्कार  के दौरान फुटबाल टीम के उपाध्यक्ष  कुंडू .

 Ashiqur Rahman Miku ,Secretary General
Bangladesh District & Divisional Sports Organizer Council 
शकुन त्रिवेदी के साथ बंगलादेश फुटबाल टीम के कोच तथा मिस्टर कुंडू 
News Editor 'THE WAKE' Rajesh Mishra
along with National Commentator Shri Mihir Das .
'THE WAKE' TEAM
AT RANAGHAT  STADIUM (WB)
Kolkata Earth Life organised this friendly event just to promote Football match among youths & bring  dashing -dynamic Football player out.

Tuesday, 13 September 2011

published news " cancer awareness'


प्रकाशित समाचार 
छपते -छपते हिंदी दैनिक 

विश्वामित्र हिंदी दैनिक 

राजस्थान पत्रिका हिंदी दैनिक 

सेवा संसार सांध्य दैनिक 

दैनिक जागरण हिंदी दैनिक 

भारतमित्र  हिंदी दैनिक 
प्रभात खबर हिंदी दैनिक 


Monday, 12 September 2011

CANCER AWARENESS

a "cancer awareness " program organised by 'THE WAKE' Hindi monthly magazine,
'डी वेक ' टीम , केंसर सर्जन डॉ.  विकास अगरवाल ,डॉ सुनील भंडारी  के साथ 


               कमिश्नर पुलिस श्रीमान जे पी सिंह ने इस आयोजन की भूरी -भूरी सराहना करते हुए कहा की अगर ऐसे कार्यक्रम होते रहेंगे तो लोगो में जागरूकता पैदा होगी और वे अपने स्वाथ्य के प्रति सतर्क रहेंगे तथा तम्बाकू जैसे कैंसरस नशे से भी दूर रहेंगे .
ताजा चैनल के निदेशक ,व् छपते -छ्पते के संपादक ,विशम्भर नेवर ने कहा की आज विश्व में सबसे बड़े आतंकी हमले की बरसी है ऐसे अवसर पर कैंसर जैसी भयंकर बीमारी को ख़त्म करने के लिए चलाया जाने वाला अभियान प्रशंसनीय है ,किन्तु पत्रकारों का इस  मंच पर आ कर कैंसर जागरूकता अभियान में सहयोग देना और भी प्रशंसनीय है.
पश्चिम बंग 'प्रभात खबर ' के प्रभारी कौशल किशोर ने कैंसर की भयावहता पर रौशनी डालते हुए कहा की हम सभी का ये दायित्व है की हम अधिक से अधिक लोगो को जागरूक करे और कैंसर मुक्त समाज बनाने में सहयोग दे . उन्होंने 'द वेक' मासिक  पत्रिका एवं दीन दयाल सेवा केंद्र के कैंसर जागरूक अभियान चलाने के लिए सराहना भी की .
कैंसर सर्जन डॉ. विकास अगरवाल ने कैंसर के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए उसके  लक्षणों के बारे में बताया उसका निदान किस प्रकार  होना चाहिए और उसे रोकने के लिए क्या करना चाहिए उस पर भी रौशनी डालते हुए समझाया की हमारी वर्तमान जीवन शैली ने हम सभी को काफी प्रभावित किया है ,इसी वजह से आज बहुत से लोग ऐसी भयंकर बीमारी से ग्रसित हो रहे है .
पश्चिम बंग "प्रभात खबर "हिंदी दैनिक के प्रभारी कौशल किशोर
 का सम्मान करते  हुएआनंद शर्मा .बायीं तरफ वैठे हुए 'डी वेक ' के प्रबंध संपादक मनोज त्रिवेदी .
'डी वेक ' के accountant शंकरलाल आचार्य
 पुलिस कमिशनर का स्वागत करतेहुए
डॉ विकास अगरवाल का सम्मान करते हुए भरत  मिश्र .
डॉ सुनील भंडारी का सम्मान करते हुए समिरदास 
                                         आयोजक शकुन त्रिवेदी एवं गणेश धनानिया 


डॉ. अशोक तिवारी  का स्वागत करते हुए 'डी वेक' के
समाचार संपादक राजेश मिश्रा
कैंसर विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित हुयी
 जिसमे बस्ती के बच्चों ने हिस्सा लिया
  'अपने पुरस्कारों के  
साथ बच्चे' .
मुफ्त में परीक्षण करते हुए डॉ. विकास अगरवाल 
डॉ सुनील भंडारी मुफ्त सेवा देते हुए .

इस कार्यक्रम का संचालन शकुन त्रिवेदी ने किया और बताया कि इस आयोजन को करने का उद्देश्य कैंसर की गंभीरता के बारे में लोगो को बताना है , कि इस बीमारी के सामने हम कितने  बेबस हो जाते है कि जेब में पैसे होते हुए भी हम अपने लोगो को नहीं बचा पाते | 
 इस  कार्यक्रम मे जिन लोगो ने सहयोग दिया उनके हम आभारी है. गणेश धनानिया , मनोज त्रिवेदी ,शंकर लाल आचार्य ,राजेश मिश्र ,आनंद शर्मा ,भरत मिश्र ,विजय शर्मा ,शिवरतन डालमिया ,निर्मल अगरवाल ,राजीव त्रिवेदी ,शुभ्रा ,सुजीत ,शुभ्रांशु ,शौर्यांक आदि .